Sri Guru Granth Sahib Ji — Ang 925 (hindi)
ਰਾਮਕਲੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥
रामकली महला ५ ॥
ਹਰਿ ਹਰਿ ਧਿਆਇ ਮਨਾ ਖਿਨੁ ਨ ਵਿਸਾਰੀਐ ॥
हे (मेरे) मन ! सदा ही परमात्मा का ध्यान धरना चाहिए। रक्ती भर समय के लिए भी उसको भुलाना नहीं चाहिए।
ਰਾਮ ਰਾਮਾ ਰਾਮ ਰਮਾ ਕੰਠਿ ਉਰ ਧਾਰੀਐ ॥
हे भाई ! उस सुंदर राम को हमेशा ही गले से हृदय में परो के रखना चाहिए।
ਉਰ ਧਾਰਿ ਹਰਿ ਹਰਿ ਪੁਰਖੁ ਪੂਰਨੁ ਪਾਰਬ੍ਰਹਮੁ ਨਿਰੰਜਨੋ ॥
हे भाई ! सब गुणों के मालिक पारब्रहम निर्लिप रही सर्व-व्यापक हरी को सदा अपने हृदय में परोए रख।
ਭੈ ਦੂਰਿ ਕਰਤਾ ਪਾਪ ਹਰਤਾ ਦੁਸਹ ਦੁਖ ਭਵ ਖੰਡਨੋ ॥
वह हरी सारे डरों को दूर करने वाला है। सारे पाप नाश करने वाला है। जनम-मरण के चक्करों को खत्म करने वाला है। उन दुखों को नाश करने वाला है जो बहुत मुश्किल से बर्दाश्त किए जा सकते हैं।
ਜਗਦੀਸ ਈਸ ਗੋੁਪਾਲ ਮਾਧੋ ਗੁਣ ਗੋਵਿੰਦ ਵੀਚਾਰੀਐ ॥
जगत के मालिक। सबके मालिक। सृष्टि के पालनहार। माया के पति प्रभू के गुणों को सदा चिक्त में बसाए रखना चाहिए;
ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਮਿਲਿ ਸੰਗਿ ਸਾਧੂ ਦਿਨਸੁ ਰੈਣਿ ਚਿਤਾਰੀਐ ॥੧॥
नानक विनती करता है- (हे भाई !) गुरू की संगति में मिल के दिन-रात उसको याद करते रहना चाहिए। 1।
ਚਰਨ ਕਮਲ ਆਧਾਰੁ ਜਨ ਕਾ ਆਸਰਾ ॥
हे भाई ! परमात्मा के सुंदर चरण ही भगत-जनों के वास्ते जीवन का सहारा हैं आसरा हैं।
ਮਾਲੁ ਮਿਲਖ ਭੰਡਾਰ ਨਾਮੁ ਅਨੰਤ ਧਰਾ ॥
बेअंत प्रभू का नाम हृदय में टिकाना ही भक्त-जनों के लिए धन-पदार्थ है जमीन की मल्कियत है। खजाना है।
ਨਾਮੁ ਨਰਹਰ ਨਿਧਾਨੁ ਜਿਨ ਕੈ ਰਸ ਭੋਗ ਏਕ ਨਰਾਇਣਾ ॥
हे भाई ! जिनके हृदय में परमात्मा का नाम-खजाना बस रहा है। उनके लिए नारायण का नाम जपना ही दुनियां के रसों-भोगों का आनंद है।
ਰਸ ਰੂਪ ਰੰਗ ਅਨੰਤ ਬੀਠਲ ਸਾਸਿ ਸਾਸਿ ਧਿਆਇਣਾ ॥
हे भाई ! बेअंत और निर्लिप प्रभू का नाम हरेक सांस के साथ जपते रहना ही उनके लिए दुनिया के रूप-रस और रंग-तमाशे हैं।
ਕਿਲਵਿਖ ਹਰਣਾ ਨਾਮ ਪੁਨਹਚਰਣਾ ਨਾਮੁ ਜਮ ਕੀ ਤ੍ਰਾਸ ਹਰਾ ॥
हे भाई ! परमात्मा का नाम सारे पाप दूर करने वाला है। प्रभू का नाम ही भक्त-जनों के लिए प्रायश्चित कर्म है। नाम ही मौत का डर दूर करने वाला है।
ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਰਾਸਿ ਜਨ ਕੀ ਚਰਨ ਕਮਲਹ ਆਸਰਾ ॥੨॥
नानक विनती करता है- (हे भाई !) परमात्मा के सुंदर चरणों का आसरा ही भगत-जनों के लिए (जिंदगी का) सरमाया है। 2।
ਗੁਣ ਬੇਅੰਤ ਸੁਆਮੀ ਤੇਰੇ ਕੋਇ ਨ ਜਾਨਈ ॥
हे मेरे स्वामी ! तेरे गुण बेअंत हैं। कोई भी जीव (तेरे गुणों का अंत) नहीं जानता।
ਦੇਖਿ ਚਲਤ ਦਇਆਲ ਸੁਣਿ ਭਗਤ ਵਖਾਨਈ ॥
(जो भी कोई मनुष्य तेरे कुछ गुणों का बयान करता है। वह) तुझ दयालु के करिश्में देख के (अथवा) भगत-जनों से सुन के (ही) बयान करता है।
ਜੀਅ ਜੰਤ ਸਭਿ ਤੁਝੁ ਧਿਆਵਹਿ ਪੁਰਖਪਤਿ ਪਰਮੇਸਰਾ ॥
हे जीवों के मालिक ! हे परमेश्वर ! सारे जीव-जंतु तुझे ध्याते हैं।
ਸਰਬ ਜਾਚਿਕ ਏਕੁ ਦਾਤਾ ਕਰੁਣਾ ਮੈ ਜਗਦੀਸਰਾ ॥
हे तरस-रूप प्रभू ! हे जगत के ईश्वर ! तू अकेला ही दाता है। सारे जीव (तेरे दर से) मांगते हैं।
ਸਾਧੂ ਸੰਤੁ ਸੁਜਾਣੁ ਸੋਈ ਜਿਸਹਿ ਪ੍ਰਭ ਜੀ ਮਾਨਈ ॥
हे भाई ! जिस मनुष्य को प्रभू स्वयं आदर बख्शता है वही साधू है वही सुजान संत है।
ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਕਰਹੁ ਕਿਰਪਾ ਸੋਇ ਤੁਝਹਿ ਪਛਾਨਈ ॥੩॥
नानक विनती करता है - हे प्रभू ! जिस जीव पर तू कृपा करता है। वही तुझे पहचानता है (तेरे साथ गहरी सांझ डालता है)। 3।
ਮੋਹਿ ਨਿਰਗੁਣ ਅਨਾਥੁ ਸਰਣੀ ਆਇਆ ॥
हे भाई ! मैं गुण-हीन था। मैं निआसरा था (गुरू की कृपा से मैं प्रभू की) शरण आ पड़ा हूँ।
ਬਲਿ ਬਲਿ ਬਲਿ ਗੁਰਦੇਵ ਜਿਨਿ ਨਾਮੁ ਦ੍ਰਿੜਾਇਆ ॥
(उस) गुरू से सदके जाता हूँ। लिहार जाता हूँ। कुर्बान जाता हूँ। जिसने (मेरे हृदय में प्रभू का) नाम पक्का कर दिया है।
ਗੁਰਿ ਨਾਮੁ ਦੀਆ ਕੁਸਲੁ ਥੀਆ ਸਰਬ ਇਛਾ ਪੁੰਨੀਆ ॥
गुरू ने (जिस किसी को भी परमात्मा का) नाम दिया (उसके अंदर) आत्मिक आनंद बन गया। (उसकी) सारी मुरादें पूरी हो गई; (गुरू ने उसके अंदर से) ईष्या खत्म कर दी।
ਜਲਨੇ ਬੁਝਾਈ ਸਾਂਤਿ ਆਈ ਮਿਲੇ ਚਿਰੀ ਵਿਛੁੰਨਿਆ ॥
(उसके अंदर) ठंड पड़ गई। वह (प्रभू से) चिरों से विछुड़ा हुआ (दोबारा) मिल गया।
ਆਨੰਦ ਹਰਖ ਸਹਜ ਸਾਚੇ ਮਹਾ ਮੰਗਲ ਗੁਣ ਗਾਇਆ ॥
(हे भाई ! जिसने भी गुरू की शरण पड़ कर) बड़ा आनंद पैदा करने वाले हरी-गुण गाने आरम्भ किए। उसके अंदर अटल आत्मिक अडोलता की खुशियां और आनंद बन गए।
ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਨਾਮੁ ਪ੍ਰਭ ਕਾ ਗੁਰ ਪੂਰੇ ਤੇ ਪਾਇਆ ॥੪॥੨॥
नानक विनती करता है- हे भाई ! परमात्मा का (ऐसा) नाम पूरे गुरू से (ही) मिलता है। 4। 2।
ਰਾਮਕਲੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥
रामकली महला ५ ॥
ਰੁਣ ਝੁਣੋ ਸਬਦੁ ਅਨਾਹਦੁ ਨਿਤ ਉਠਿ ਗਾਈਐ ਸੰਤਨ ਕੈ ॥
हे भाई ! नित्य उठ के (उद्यम करके) साध-संगति में जा के परमात्मा की सिफतसालाह की मीठी-मीठी सुर वाली बाणी एक-रस गानी चाहिए।
ਕਿਲਵਿਖ ਸਭਿ ਦੋਖ ਬਿਨਾਸਨੁ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਜਪੀਐ ਗੁਰ ਮੰਤਨ ਕੈ ॥
हे भाई ! परमात्मा का नाम सारे पापों और ऐबों का नाश करने वाला है। यह हरी-नाम गुरू की शिक्षा पर चल कर जपना चाहिए।
ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਲੀਜੈ ਅਮਿਉ ਪੀਜੈ ਰੈਣਿ ਦਿਨਸੁ ਅਰਾਧੀਐ ॥
हे भाई ! परमात्मा का नाम जपना चाहिए। आत्मिक जीवन देने वाला हरी-नाम-जल पीना चाहिए। दिन-रात परमात्मा की आराधना करनी चाहिए।
ਜੋਗ ਦਾਨ ਅਨੇਕ ਕਿਰਿਆ ਲਗਿ ਚਰਣ ਕਮਲਹ ਸਾਧੀਐ ॥
प्रभू के सुंदर-चरणों में जुड़ के (मानो) अनेकों योग-साधनों का। अनेकों दान-पुन्यों का। अनेकों ऐसी और क्रियाओं का साधन हो जाता है।
ਭਾਉ ਭਗਤਿ ਦਇਆਲ ਮੋਹਨ ਦੂਖ ਸਗਲੇ ਪਰਹਰੈ ॥
हे भाई ! दया के श्रोत मोहन-प्रभू का प्यार प्रभू की भक्ति सारे दुख दूर कर देती है।
ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਤਰੈ ਸਾਗਰੁ ਧਿਆਇ ਸੁਆਮੀ ਨਰਹਰੈ ॥੧॥
नानक कहता है- हे भाई ! मालिक प्रभू को सिमर के मनुष्य संसार-समुंद्र से पार लांघ जाता है। 1।
ਸੁਖ ਸਾਗਰ ਗੋਬਿੰਦ ਸਿਮਰਣੁ ਭਗਤ ਗਾਵਹਿ ਗੁਣ ਤੇਰੇ ਰਾਮ ॥
हे सुखों के समुंद्र गोबिंद ! (तेरे) भगत (तेरा) सिमरन (करते हैं)। तेरे गुण गाते हैं;
ਅਨਦ ਮੰਗਲ ਗੁਰ ਚਰਣੀ ਲਾਗੇ ਪਾਏ ਸੂਖ ਘਨੇਰੇ ਰਾਮ ॥
गुरू के चरणों में लग के उनको अनेकों आनंद खुशियां और सुख प्राप्त हो जाते हैं।
ਸੁਖ ਨਿਧਾਨੁ ਮਿਲਿਆ ਦੂਖ ਹਰਿਆ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਿ ਪ੍ਰਭਿ ਰਾਖਿਆ ॥
(हे भाई ! जिसको गुरू मिल जाता है उसको) सुखों का खजाना हरी-नाम मिल जाता है। प्रभू ने कृपा करके जिस मनुष्य की (दुख आदि से) रक्षा की। उसके सारे दुख निर्वित हो गए।
ਹਰਿ ਚਰਣ ਲਾਗਾ ਭ੍ਰਮੁ ਭਉ ਭਾਗਾ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਰਸਨਾ ਭਾਖਿਆ ॥
हे भाई ! जो मनुष्य परमात्मा के चरणों में जुड़ गया। जिसने परमात्मा का नाम अपनी जीभ से उचारना शुरू कर दिया। उसका हरेक किस्म का भरम-वहम और डर दूर हो गया।
ਹਰਿ ਏਕੁ ਚਿਤਵੈ ਪ੍ਰਭੁ ਏਕੁ ਗਾਵੈ ਹਰਿ ਏਕੁ ਦ੍ਰਿਸਟੀ ਆਇਆ ॥
नानक विनती करता है- हे भाई ! जिस मनुष्य पर प्रभू ने कृपा की। उसको पूरा गुरू मिल गया।