Sri Guru Granth Sahib Ji — Ang 868 (hindi)
ਨਾਰਾਇਣ ਸਭ ਮਾਹਿ ਨਿਵਾਸ ॥
हे भाई ! सब जीवों में नारायण का निवास है।
ਨਾਰਾਇਣ ਘਟਿ ਘਟਿ ਪਰਗਾਸ ॥
हरेक शरीर में नारायण (की ज्योति) का ही प्रकाश है।
ਨਾਰਾਇਣ ਕਹਤੇ ਨਰਕਿ ਨ ਜਾਹਿ ॥
नारायण (का नाम) जपने वाले जीव नर्क में नहीं पड़ते।
ਨਾਰਾਇਣ ਸੇਵਿ ਸਗਲ ਫਲ ਪਾਹਿ ॥੧॥
नारायण की भक्ति करके सारे फल प्राप्त कर लेते हैं। 1।
ਨਾਰਾਇਣ ਮਨ ਮਾਹਿ ਅਧਾਰ ॥
हे भाई ! नारायण (के नाम) को (अपने) मन में आसरा बना ले।
ਨਾਰਾਇਣ ਬੋਹਿਥ ਸੰਸਾਰ ॥
नारायण (का नाम) संसार-समुंद्र में पार लंघाने के लिए जहाज है।
ਨਾਰਾਇਣ ਕਹਤ ਜਮੁ ਭਾਗਿ ਪਲਾਇਣ ॥
नारायण का नाम जपने से जम भाग के परे चला जाता है।
ਨਾਰਾਇਣ ਦੰਤ ਭਾਨੇ ਡਾਇਣ ॥੨॥
नारायण (का नाम माया रूपी) डायन के दाँत तोड़ देता है। 2।
ਨਾਰਾਇਣ ਸਦ ਸਦ ਬਖਸਿੰਦ ॥
हे भाई ! नारायण सदा ही बख्शनहार है।
ਨਾਰਾਇਣ ਕੀਨੇ ਸੂਖ ਅਨੰਦ ॥
नारायण (अपने सेवकों के दिल में) सुख-आनंद पैदा करता है।
ਨਾਰਾਇਣ ਪ੍ਰਗਟ ਕੀਨੋ ਪਰਤਾਪ ॥
(उनके अंदर अपना) तेज-प्रताप प्रकट करता है।
ਨਾਰਾਇਣ ਸੰਤ ਕੋ ਮਾਈ ਬਾਪ ॥੩॥
हे भाई ! नारायण अपने सेवकों-संतों का माता-पिता (जैसे रखवाला) है। 3।
ਨਾਰਾਇਣ ਸਾਧਸੰਗਿ ਨਰਾਇਣ ॥
हे भाई ! जो मनुष्य साध-संगति में टिक के सदा नारायण का नाम जपते हैं।
ਬਾਰੰ ਬਾਰ ਨਰਾਇਣ ਗਾਇਣ ॥
बार-बार उसकी सिफत-सालाह के गीत गाते हैं।
ਬਸਤੁ ਅਗੋਚਰ ਗੁਰ ਮਿਲਿ ਲਹੀ ॥
वे मनुष्य गुरू को मिल के (वह मिलाप-रूपी कीमती) वस्तु पा लेते हैं जो इन इन्द्रियों की पहुँच से परे है।
ਨਾਰਾਇਣ ਓਟ ਨਾਨਕ ਦਾਸ ਗਹੀ ॥੪॥੧੭॥੧੯॥
हे नानक ! नारायण के दास सदा नारायण का आसरा लिए रखते हैं। 4। 17। 19।
ਗੋਂਡ ਮਹਲਾ ੫ ॥
गोंड महला ५ ॥
ਜਾ ਕਉ ਰਾਖੈ ਰਾਖਣਹਾਰੁ ॥
हे भाई ! जिस मनुष्य को रखने में समर्थ प्रभू (कामादिक विकारों से) बचाना चाहता है।
ਤਿਸ ਕਾ ਅੰਗੁ ਕਰੇ ਨਿਰੰਕਾਰੁ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
प्रभू उस मनुष्य का पक्ष करता है (उसकी सहायता करता है)। 1। रहाउ।
ਮਾਤ ਗਰਭ ਮਹਿ ਅਗਨਿ ਨ ਜੋਹੈ ॥
हे भाई ! (जैसे जीव को) माँ के पेट में आग दुख नहीं देती।
ਕਾਮੁ ਕ੍ਰੋਧੁ ਲੋਭੁ ਮੋਹੁ ਨ ਪੋਹੈ ॥
(वैसे ही प्रभू जिस मनुष्य की सहायता करता है। उसको) काम-क्रोध-लोभ-मोह (कोई भी) अपने दबाव तले नहीं ला सकते।
ਸਾਧਸੰਗਿ ਜਪੈ ਨਿਰੰਕਾਰੁ ॥
वह मनुष्य गुरू की संगति में टिक के परमात्मा का नाम जपता है।
ਨਿੰਦਕ ਕੈ ਮੁਹਿ ਲਾਗੈ ਛਾਰੁ ॥੧॥
(पर उस) की निंदा करने वाले मनुष्य के सिर पर राख पड़ती है (निंदक बदनामी ही कमाता है)। 1।
ਰਾਮ ਕਵਚੁ ਦਾਸ ਕਾ ਸੰਨਾਹੁ ॥
हे भाई ! परमात्मा (का नाम) सेवक के लिए (शस्त्रों की मार से बचाने वाला) तंत्र है। संजाअ है (जिस मनुष्य के पास राम-राम का कवच है संजोअ है)
ਦੂਤ ਦੁਸਟ ਤਿਸੁ ਪੋਹਤ ਨਾਹਿ ॥
उसको (कामादिक) दुष्ट वैरी छू भी नहीं सकते।
ਜੋ ਜੋ ਗਰਬੁ ਕਰੇ ਸੋ ਜਾਇ ॥
(पर) जो जो मनुष्य (अपनी ताकत का) गुमान करते हैं। वे (आत्मिक जीवन की ओर से) तबाह हो जाते हैं।
ਗਰੀਬ ਦਾਸ ਕੀ ਪ੍ਰਭੁ ਸਰਣਾਇ ॥੨॥
ग़रीब का आसरा सेवक का आसरा प्रभू आप ही है। 2।
ਜੋ ਜੋ ਸਰਣਿ ਪਇਆ ਹਰਿ ਰਾਇ ॥
हे भाई ! जो जो मनुष्य प्रभू-पातशाह की शरण पड़ जाता है।
ਸੋ ਦਾਸੁ ਰਖਿਆ ਅਪਣੈ ਕੰਠਿ ਲਾਇ ॥
उस सेवक को प्रभू अपने गले से लगा के (दुष्ट दूतों से) बचा लेता है।
ਜੇ ਕੋ ਬਹੁਤੁ ਕਰੇ ਅਹੰਕਾਰੁ ॥
पर जो मनुष्य (अपनी ही ताकत पर) बड़ा घमण्ड करता है।
ਓਹੁ ਖਿਨ ਮਹਿ ਰੁਲਤਾ ਖਾਕੂ ਨਾਲਿ ॥੩॥
वह मनुष्य (इन दूतों के मुकाबले के दौरान) एक छिन में ही मिट्टी में मिल जाता है। 3।
ਹੈ ਭੀ ਸਾਚਾ ਹੋਵਣਹਾਰੁ ॥
हे भाई ! सदा कायम रहने वाला प्रभू अब भी मौजूद है। सदा के लिए मौजूद रहेगा।
ਸਦਾ ਸਦਾ ਜਾੲਂੀ ਬਲਿਹਾਰ ॥
मैं सदा उस पर सदके जाता हूँ।
ਅਪਣੇ ਦਾਸ ਰਖੇ ਕਿਰਪਾ ਧਾਰਿ ॥
हे भाई ! नानक के प्रभू जी अपने दासों की जिंद के आसरा हैं।
ਨਾਨਕ ਕੇ ਪ੍ਰਭ ਪ੍ਰਾਣ ਅਧਾਰ ॥੪॥੧੮॥੨੦॥
प्रभू अपने दास को कृपा करके (विकारों से सदा) बचाता है। 4। 18। 20।
ਗੋਂਡ ਮਹਲਾ ੫ ॥
गोंड महला ५ ॥
ਅਚਰਜ ਕਥਾ ਮਹਾ ਅਨੂਪ ॥ ਪ੍ਰਾਤਮਾ ਪਾਰਬ੍ਰਹਮ ਕਾ ਰੂਪੁ ॥ ਰਹਾਉ ॥
जिसकी सिफत-सालाह की बातें आश्चर्यजनक हैं और बहुत ही अद्वितीय हैं हे भाई ! जीवात्मा उस परमात्मा का रूप है । रहाउ।
ਨਾ ਇਹੁ ਬੂਢਾ ਨਾ ਇਹੁ ਬਾਲਾ ॥
( हे भाई ! जीवात्मा जिस परमात्मा का रूप है वह ऐसा है कि) ना ये कभी बुड्ढा होता है। ना ही ये कभी बालक (अवस्था में पराधीन) होता है।
ਨਾ ਇਸੁ ਦੂਖੁ ਨਹੀ ਜਮ ਜਾਲਾ ॥
इसको कोई दुख छू नहीं सकता। जमों का जाल फंसा नहीं सकता।
ਨਾ ਇਹੁ ਬਿਨਸੈ ਨਾ ਇਹੁ ਜਾਇ ॥
(परमात्मा ऐसा है कि) ना ये कभी मरता है ना कभी पैदा होता है।
ਆਦਿ ਜੁਗਾਦੀ ਰਹਿਆ ਸਮਾਇ ॥੧॥
ये तो आरम्भ से ही। युगों की शुरूवात से ही (हर जगह) व्यापक चला आ रहा है। 1।
ਨਾ ਇਸੁ ਉਸਨੁ ਨਹੀ ਇਸੁ ਸੀਤੁ ॥
(हे भाई ! जीवात्मा जिस परमात्मा का रूप है वह ऐसा है कि) इसको (विकारों की) तपश नहीं सता सकती (चिंता-फिक्र का) पाला नहीं व्याप सकता।
ਨਾ ਇਸੁ ਦੁਸਮਨੁ ਨਾ ਇਸੁ ਮੀਤੁ ॥
ना इसका कोई वैरी है ना मित्र है (क्योंकि इसके बराबर का कोई नहीं है)।
ਨਾ ਇਸੁ ਹਰਖੁ ਨਹੀ ਇਸੁ ਸੋਗੁ ॥
कोई खुशी अथवा ग़मी भी इसके ऊपर प्रभाव नहीं डाल सकती।
ਸਭੁ ਕਿਛੁ ਇਸ ਕਾ ਇਹੁ ਕਰਨੈ ਜੋਗੁ ॥੨॥
(जगत की) हरेक चीज़ इसी की ही पैदा की हुई है। ये सब कुछ करने के समर्थ है। 2।
ਨਾ ਇਸੁ ਬਾਪੁ ਨਹੀ ਇਸੁ ਮਾਇਆ ॥
(हे भाई ! जीवात्मा जिस परमात्मा का रूप है वह ऐसा है कि) इसका ना कोई पिता है। ना ही इसकी माँ है।
ਇਹੁ ਅਪਰੰਪਰੁ ਹੋਤਾ ਆਇਆ ॥
यह तो परे से परे है। और सदा अस्तित्व वाला है।
ਪਾਪ ਪੁੰਨ ਕਾ ਇਸੁ ਲੇਪੁ ਨ ਲਾਗੈ ॥
पाप और पून्य का भी इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
ਘਟ ਘਟ ਅੰਤਰਿ ਸਦ ਹੀ ਜਾਗੈ ॥੩॥
यह प्रभू हरेक शरीर के अंदर मौजूद है। और सदा ही सचेत रहता है। 3।
ਤੀਨਿ ਗੁਣਾ ਇਕ ਸਕਤਿ ਉਪਾਇਆ ॥
ये तीन गुणों वाली माया उसी ने ही पैदा की है।
ਮਹਾ ਮਾਇਆ ਤਾ ਕੀ ਹੈ ਛਾਇਆ ॥
(हे भाई ! जीवात्मा जिस परमात्मा का रूप है) यह बहुत ही बलवान माया उसी की ही परछाई है।
ਅਛਲ ਅਛੇਦ ਅਭੇਦ ਦਇਆਲ ॥
उस प्रभू को (कोई विकार) छल नहीं सकते। भेद नहीं सकते। उसका भेद नहीं पाया जा सकता। वह दया का घर है।
ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਸਦਾ ਕਿਰਪਾਲ ॥
वह दीनों पर सदा दया करने वाला है। और। दया कास श्रोत है।
ਤਾ ਕੀ ਗਤਿ ਮਿਤਿ ਕਛੂ ਨ ਪਾਇ ॥
वह प्रभू कैसा है और कितना बड़ा है- ये भेद पाया नहीं जा सकता।
ਨਾਨਕ ਤਾ ਕੈ ਬਲਿ ਬਲਿ ਜਾਇ ॥੪॥੧੯॥੨੧॥
नानक उस प्रभू से हमेशा ही सदके जाता है। 4। 19। 21।