Sri Guru Granth Sahib Ji — Ang 547 (hindi)
ਬਿਨਵੰਤ ਨਾਨਕ ਕਰ ਦੇਇ ਰਾਖਹੁ ਗੋਬਿੰਦ ਦੀਨ ਦਇਆਰਾ ॥੪॥
नानक विनती करता है– हे गोविंद ! हे दीनों पर दया करने वाले !अपना हाथ दे के मुझे (माया में डूबने से) बचा ले। 4।
ਸੋ ਦਿਨੁ ਸਫਲੁ ਗਣਿਆ ਹਰਿ ਪ੍ਰਭੂ ਮਿਲਾਇਆ ਰਾਮ ॥
हे भाई ! वह दिन भाग्यशाली समझना चाहिए जब हरी-प्रभू (गुरू के) मिलाने से (मिल जाता है)।
ਸਭਿ ਸੁਖ ਪਰਗਟਿਆ ਦੁਖ ਦੂਰਿ ਪਰਾਇਆ ਰਾਮ ॥
(हृदय में) सारे सुख प्रगट हो जाते हैं।और।सारे दुख दूर जा पड़ते हैं।
ਸੁਖ ਸਹਜ ਅਨਦ ਬਿਨੋਦ ਸਦ ਹੀ ਗੁਨ ਗੁਪਾਲ ਨਿਤ ਗਾਈਐ ॥
हे भाई ! आओ।जगत-पाल प्रभू के गुण नित्य गाते रहें (सिफत सालाह की बरकति से हृदय में) सदा ही आत्मिक अडोलता के सुख-आनंद बने रहते हैं।खुशियां बनी रहती हैं।
ਭਜੁ ਸਾਧਸੰਗੇ ਮਿਲੇ ਰੰਗੇ ਬਹੁੜਿ ਜੋਨਿ ਨ ਧਾਈਐ ॥
हे भाई ! गुरू की संगति में प्रेम से मिल के परमात्मा का भजन किया कर (भजन की बरकति से) दोबारा जोनियों में पड़ना पड़ता।
ਗਹਿ ਕੰਠਿ ਲਾਏ ਸਹਜਿ ਸੁਭਾਏ ਆਦਿ ਅੰਕੁਰੁ ਆਇਆ ॥
परमात्मा (बाँह से) पकड़ के अपने गले से लगा लेता है।आत्मिक अडोलता में प्रेम में (लीन कर देता है।हृदय में भक्ति का) आदि अंकुर फूट पड़ता है।
ਬਿਨਵੰਤ ਨਾਨਕ ਆਪਿ ਮਿਲਿਆ ਬਹੁੜਿ ਕਤਹੂ ਨ ਜਾਇਆ ॥੫॥੪॥੭॥
नानक विनती करता है– (हे भाई ! साध-संगति में मिलने से) प्रभू स्वयं आ मिलता है।फिर (उसका दर छोड़ के) कहीं और भटकने की जरूरत नहीं रह जाती। 5। 4। 7।
ਬਿਹਾਗੜਾ ਮਹਲਾ ੫ ਛੰਤ ॥
बिहागड़ा महला ५ छंत ॥
ਸੁਨਹੁ ਬੇਨੰਤੀਆ ਸੁਆਮੀ ਮੇਰੇ ਰਾਮ ॥
हे मेरे मालिक ! मेरी विनती सुन।
ਕੋਟਿ ਅਪ੍ਰਾਧ ਭਰੇ ਭੀ ਤੇਰੇ ਚੇਰੇ ਰਾਮ ॥
(हम जीव) करोड़ों पापों से लिबड़े हुए हैं।पर फिर भी तेरे (दर के) दास हैं।
ਦੁਖ ਹਰਨ ਕਿਰਪਾ ਕਰਨ ਮੋਹਨ ਕਲਿ ਕਲੇਸਹ ਭੰਜਨਾ ॥
हे दुखों का नाश करने वाले ! हे कृपा करने वाले ! हे मोहन ! हे हमारे दुख-कलेश दूर करने वाले !
ਸਰਨਿ ਤੇਰੀ ਰਖਿ ਲੇਹੁ ਮੇਰੀ ਸਰਬ ਮੈ ਨਿਰੰਜਨਾ ॥
मैं तेरी शरण आया हूँ। मेरी लाज रख ले।हे सर्व-व्यापक ! हे निर्लिप प्रभू !
ਸੁਨਤ ਪੇਖਤ ਸੰਗਿ ਸਭ ਕੈ ਪ੍ਰਭ ਨੇਰਹੂ ਤੇ ਨੇਰੇ ॥
हे प्रभू ! तू हमारे अति नजदीक बसता है।तू सब जीवों के अंग-संग रहता है।तू सब जीवों की अरदासें सुनता है।तू सब जीवों के किए काम देखता है।
ਅਰਦਾਸਿ ਨਾਨਕ ਸੁਨਿ ਸੁਆਮੀ ਰਖਿ ਲੇਹੁ ਘਰ ਕੇ ਚੇਰੇ ॥੧॥
हे मेरे स्वामी ! नानक की विनती सुन।मैं तेरे घर का गुलाम हूँ।मेरी इज्जत रख ले। 1।
ਤੂ ਸਮਰਥੁ ਸਦਾ ਹਮ ਦੀਨ ਭੇਖਾਰੀ ਰਾਮ ॥
हे प्रभू ! तू सब ताकतों का मालिक है।हम (तेरे दर पर) निमाणे से मंगते हैं।
ਮਾਇਆ ਮੋਹਿ ਮਗਨੁ ਕਢਿ ਲੇਹੁ ਮੁਰਾਰੀ ਰਾਮ ॥
हे मुरारी ! मैं माया के मोह में डूबा रहता हूँ।मुझे (मोह में से) निकाल ले।
ਲੋਭਿ ਮੋਹਿ ਬਿਕਾਰਿ ਬਾਧਿਓ ਅਨਿਕ ਦੋਖ ਕਮਾਵਨੇ ॥
मैं लोभ में।मोह में।विकार में बँधा रहता हूँ।हे प्रभू ! हम जीव अनेकों पाप कमाते रहते हैं।
ਅਲਿਪਤ ਬੰਧਨ ਰਹਤ ਕਰਤਾ ਕੀਆ ਅਪਨਾ ਪਾਵਨੇ ॥
(हे भाई !) एक करतार ही निर्लिप रहता है।और बँधनों से आजाद है।हम जीव तो अपने किए कर्मों का फल भुगतते रहते हैं।
ਕਰਿ ਅਨੁਗ੍ਰਹੁ ਪਤਿਤ ਪਾਵਨ ਬਹੁ ਜੋਨਿ ਭ੍ਰਮਤੇ ਹਾਰੀ ॥
हे विकारियों को पवित्र करने वाले प्रभू ! मेहर कर।अनेकों जूनियों में भटक-भटक के (मेरी आत्मा) थक गई है।
ਬਿਨਵੰਤਿ ਨਾਨਕ ਦਾਸੁ ਹਰਿ ਕਾ ਪ੍ਰਭ ਜੀਅ ਪ੍ਰਾਨ ਅਧਾਰੀ ॥੨॥
(हे भाई !) नानक विनती करता है– नानक उस हरी का उस प्रभू का दास है जो (सब जीवों की) जिंद का प्राणों का आसरा है। 2।
ਤੂ ਸਮਰਥੁ ਵਡਾ ਮੇਰੀ ਮਤਿ ਥੋਰੀ ਰਾਮ ॥
हे राम ! तू बड़ी ताकत वाला है।मेरी मति तो छोटी सी है (तेरे बड़प्पन को समझ नहीं सकती)।
ਪਾਲਹਿ ਅਕਿਰਤਘਨਾ ਪੂਰਨ ਦ੍ਰਿਸਟਿ ਤੇਰੀ ਰਾਮ ॥
हे प्रभू ! तेरी निगाह सदा एक सार है तू अकृतघनों ना-शुक्रों को भी पालता रहता है।
ਅਗਾਧਿ ਬੋਧਿ ਅਪਾਰ ਕਰਤੇ ਮੋਹਿ ਨੀਚੁ ਕਛੂ ਨ ਜਾਨਾ ॥
हे करतार ! हे बेअंत प्रभू ! तू जीवों की समझ से परे व अथाह है।मैं नीच जीवन वाला (तेरे बारे में) कुछ भी नहीं जान सकता।
ਰਤਨੁ ਤਿਆਗਿ ਸੰਗ੍ਰਹਨ ਕਉਡੀ ਪਸੂ ਨੀਚੁ ਇਆਨਾ ॥
हे प्रभू ! तेरा कीमती नाम छोड़ के मैं कौड़ियां इकट्ठी करता रहता हूँ।मैं पशु-स्वभाव वाला हूँ।नीच हूँ।अंजान हूँ।
ਤਿਆਗਿ ਚਲਤੀ ਮਹਾ ਚੰਚਲਿ ਦੋਖ ਕਰਿ ਕਰਿ ਜੋਰੀ ॥
मैं पाप कर-कर के (उस माया को ही) जोड़ता रहा जो कभी टिक के नहीं बैठती।जो जीवों का साथ छोड़ जाती है।
ਨਾਨਕ ਸਰਨਿ ਸਮਰਥ ਸੁਆਮੀ ਪੈਜ ਰਾਖਹੁ ਮੋਰੀ ॥੩॥
हे नानक ! (कह–) हे सब ताकतों के मालिक मेरे स्वामी ! मैं तेरी शरण आया हूँ।मेरी लाज रख ले। 3।
ਜਾ ਤੇ ਵੀਛੁੜਿਆ ਤਿਨਿ ਆਪਿ ਮਿਲਾਇਆ ਰਾਮ ॥
गुणों की संगति में आ के (जिस मनुष्य ने) परमात्मा के सिफत सालाह के गीत गाने आरम्भ कर दिए (उस मनुष्य को) उस परमात्मा ने खुद अपने चरणों में जोड़ लिया जिससे (वह चिरों से) विछुड़ा चला आ रहा था।
ਸਾਧੂ ਸੰਗਮੇ ਹਰਿ ਗੁਣ ਗਾਇਆ ਰਾਮ ॥
संतों की सभा में सम्मिलित होकर श्रीहरि का गुणगान किया है |
ਗੁਣ ਗਾਇ ਗੋਵਿਦ ਸਦਾ ਨੀਕੇ ਕਲਿਆਣ ਮੈ ਪਰਗਟ ਭਏ ॥
परमात्मा की सिफत सालाह के गीत सदा गाने की बरकति से आनंदमयी परमात्मा (हृदय में) प्रकट हो जाता है।
ਸੇਜਾ ਸੁਹਾਵੀ ਸੰਗਿ ਪ੍ਰਭ ਕੈ ਆਪਣੇ ਪ੍ਰਭ ਕਰਿ ਲਏ ॥
(जिस मनुष्य के हृदय में प्रभू प्रकट होता है) प्रभू की संगति से उसकी हृदय-सेज आनंद-भरपूर हो जाती है।प्रभू उसको अपना (सेवक) बना लेता है।
ਛੋਡਿ ਚਿੰਤ ਅਚਿੰਤ ਹੋਏ ਬਹੁੜਿ ਦੂਖੁ ਨ ਪਾਇਆ ॥
वह दुनियावी चिंता-फिक्र त्याग के शांत-चिक्त हो जाते हैं।उनको दोबारा कोई दुख छू नहीं सकता।
ਨਾਨਕ ਦਰਸਨੁ ਪੇਖਿ ਜੀਵੇ ਗੋਵਿੰਦ ਗੁਣ ਨਿਧਿ ਗਾਇਆ ॥੪॥੫॥੮॥
हे नानक ! (कह–) जो मनुष्य गुणों के खजाने परमात्मा की सिफत सालाह के गीत गाते हैं वह (अपने अंदर) परमात्मा का दर्शन करके आत्मिक जीवन वाले बन जाते हैं।4। 5। 8।
ਬਿਹਾਗੜਾ ਮਹਲਾ ੫ ਛੰਤ ॥
बिहागड़ा महला ५ छंत ॥
ਬੋਲਿ ਸੁਧਰਮੀੜਿਆ ਮੋਨਿ ਕਤ ਧਾਰੀ ਰਾਮ ॥
हे (सारी) जूनियों में से (उक्तम फर्ज वाले।धर्म वाले !) परमात्मा के सिफत सालाह के बोल बोला कर।(सिफत सालाह से) तूने क्यूँ चुप धारण की हुई है।
ਤੂ ਨੇਤ੍ਰੀ ਦੇਖਿ ਚਲਿਆ ਮਾਇਆ ਬਿਉਹਾਰੀ ਰਾਮ ॥
अपनी आँखों से (ध्यान से) देख; (निरी) माया का व्यवहार करने वाला (यहाँ से खाली हाथ) चला जाता है।
ਸੰਗਿ ਤੇਰੈ ਕਛੁ ਨ ਚਾਲੈ ਬਿਨਾ ਗੋਬਿੰਦ ਨਾਮਾ ॥
हे भाई ! परमात्मा के नाम के बिना और कोई चीज तेरे साथ नहीं जा सकती।
ਦੇਸ ਵੇਸ ਸੁਵਰਨ ਰੂਪਾ ਸਗਲ ਊਣੇ ਕਾਮਾ ॥
देशों (की हकूमतें)।कपड़े सोना।चाँदी (-इनकी खातिर किए हुए) सारे उद्यम व्यर्थ हो जाते हैं।
ਪੁਤ੍ਰ ਕਲਤ੍ਰ ਨ ਸੰਗਿ ਸੋਭਾ ਹਸਤ ਘੋਰਿ ਵਿਕਾਰੀ ॥
हे भाई ! पुत्र।स्त्री।दुनियावी मान-सम्मान- कुछ भी मनुष्य के साथ नहीं जाता।हाथी घोड़े आदि की लालसाएं भी विकारों की ओर ले जाती हैं।
ਬਿਨਵੰਤ ਨਾਨਕ ਬਿਨੁ ਸਾਧਸੰਗਮ ਸਭ ਮਿਥਿਆ ਸੰਸਾਰੀ ॥੧॥
नानक विनती करता है– साध-संगत के बिना दुनिया के सारे उद्यम नाशवान हैं।