Sri Guru Granth Sahib Ji — Ang 204 (hindi)
ਰਾਗੁ ਗਉੜੀ ਪੂਰਬੀ ਮਹਲਾ ੫
रागु गउड़ी पूरबी महला ५
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है।
ਕਵਨ ਗੁਨ ਪ੍ਰਾਨਪਤਿ ਮਿਲਉ ਮੇਰੀ ਮਾਈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
हे मेरी माँ !मैं कौन से गुणों के बल पर अपनी जीवात्मा के मालिक प्रभू को मिल सकूँ? (मेरे में तो कोई भी गुण नहीं)। 1। रहाउ।
ਰੂਪ ਹੀਨ ਬੁਧਿ ਬਲ ਹੀਨੀ ਮੋਹਿ ਪਰਦੇਸਨਿ ਦੂਰ ਤੇ ਆਈ ॥੧॥
(हे मेरी माँ !) मैं आत्मिक रूप से खाली हूँ~ बुद्धि हीन हूँ~ (मेरे अंदर आत्मिक) शक्ति भी नहीं है (फिर) मैं परदेसन हूँ (मैंने प्रभू चरणों को कभी भी अपनी घर नहीं बनाया) अनेको जूनियों की यात्रा पार कर के (इस मानस जन्म में) आई हूँ। 1।
ਨਾਹਿਨ ਦਰਬੁ ਨ ਜੋਬਨ ਮਾਤੀ ਮੋਹਿ ਅਨਾਥ ਕੀ ਕਰਹੁ ਸਮਾਈ ॥੨॥
(हे मेरे प्राणपति !) मेरे पास तेरा नाम-धन नहीं है~ मेरे अंदर आत्मिक गुणों का जोबन भी नहीं जिसका मुझे हुलारा आ सके (और मैं गर्व कर सकूँ)। मुझ अनाथ को अपने चरणों में जोड़ ले।
ਖੋਜਤ ਖੋਜਤ ਭਈ ਬੈਰਾਗਨਿ ਪ੍ਰਭ ਦਰਸਨ ਕਉ ਹਉ ਫਿਰਤ ਤਿਸਾਈ ॥੩॥
(हे मेरी माँ !) अपने प्राणपति प्रभू के दर्शनों के लिए मैं प्यासी फिर रही हूँ~ उसे ढूँढती-ढूँढती मैं कमली हुई पड़ी हूँ।
ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ਪ੍ਰਭ ਨਾਨਕ ਸਾਧਸੰਗਿ ਮੇਰੀ ਜਲਨਿ ਬੁਝਾਈ ॥੪॥੧॥੧੧੮॥
हे नानक ! (कह–) हे दीनों पर दया करने वाले ! हे कृपा के घर ! हे प्रभू ! (तेरी मेहर से) साध-संगति ने मेरी ये विछोड़े की जलन बुझा दी है। 4। 1। 118।
ਗਉੜੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥
गउड़ी महला ५ ॥
ਪ੍ਰਭ ਮਿਲਬੇ ਕਉ ਪ੍ਰੀਤਿ ਮਨਿ ਲਾਗੀ ॥
(हे बहिन !) परमात्मा को मिलने के लिए मेरे मन में प्रीति पैदा हो गई है।
ਪਾਇ ਲਗਉ ਮੋਹਿ ਕਰਉ ਬੇਨਤੀ ਕੋਊ ਸੰਤੁ ਮਿਲੈ ਬਡਭਾਗੀ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
(परमात्मा के साथ मिला सकने वाला अगर) बड़े भाग्यों वाला (गुरू-) संत मुझे मिल जाए तो मैं उसके पैर लगूँ। मैं उसके समक्ष बिनती करूँ (कि मुझे परमात्मा से मिला दे)। 1। रहाउ।
ਮਨੁ ਅਰਪਉ ਧਨੁ ਰਾਖਉ ਆਗੈ ਮਨ ਕੀ ਮਤਿ ਮੋਹਿ ਸਗਲ ਤਿਆਗੀ ॥
मैं अपना मन उसके हवाले कर दूँ~ मैं अपना धन उसके आगे रख दूँ। (हे बहिन !) मैंने अपने मन की सारी चतुराई छोड़ दी है।
ਜੋ ਪ੍ਰਭ ਕੀ ਹਰਿ ਕਥਾ ਸੁਨਾਵੈ ਅਨਦਿਨੁ ਫਿਰਉ ਤਿਸੁ ਪਿਛੈ ਵਿਰਾਗੀ ॥੧॥
(हे बहिन !) जो (बड़े भाग्य वाला संत मुझे) परमात्मा के सिफत सालाह की बातें मुझे सुनाता रहे~ मैं हर वक्त उसके पीछे-पीछे प्रेम में कमली हुई फिरती रहूँ। 1।
ਪੂਰਬ ਕਰਮ ਅੰਕੁਰ ਜਬ ਪ੍ਰਗਟੇ ਭੇਟਿਓ ਪੁਰਖੁ ਰਸਿਕ ਬੈਰਾਗੀ ॥
हे नानक ! (कह–) पहले जन्मों में किए भले कर्मों के संस्कारों के अंगूर जिस जीव स्त्री के प्रकट हो गए~ उसको वह सर्व-व्यापक प्रभू मिल पड़ा है।
ਮਿਟਿਓ ਅੰਧੇਰੁ ਮਿਲਤ ਹਰਿ ਨਾਨਕ ਜਨਮ ਜਨਮ ਕੀ ਸੋਈ ਜਾਗੀ ॥੨॥੨॥੧੧੯॥
जो सभी जीवों में बैठा सभी रस भोगने वाला है ओर जो रसों से निर्लिप भी है। परमात्मा को मिलते ही उस जीव स्त्री के अंदर से मोह का अंधकार दूर हो जाता है। वह अनेकों जन्मों से माया के मोह में सोई हुई जाग पड़ती है। 2। 2। 119।
ਗਉੜੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥
गउड़ी महला ५ ॥
ਨਿਕਸੁ ਰੇ ਪੰਖੀ ਸਿਮਰਿ ਹਰਿ ਪਾਂਖ ॥
हे जीव-पक्षी ! (माया के मोह के घोंसले से बाहर) निकल। परमात्मा का सिमरन कर। (प्रभू का सिमरन) पंख हैं (इन पंखों की मदद से ही तू मोह के घोसले से उड़ के बाहर जा सकेगा)।
ਮਿਲਿ ਸਾਧੂ ਸਰਣਿ ਗਹੁ ਪੂਰਨ ਰਾਮ ਰਤਨੁ ਹੀਅਰੇ ਸੰਗਿ ਰਾਖੁ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
(हे भाई !) गुरू को मिल के पूरन प्रभू का आसरा ले~ परमात्मा नाम-रत्न अपने हृदय में (संभाल के) रख। 1। रहाउ।
ਭ੍ਰਮ ਕੀ ਕੂਈ ਤ੍ਰਿਸਨਾ ਰਸ ਪੰਕਜ ਅਤਿ ਤੀਖੵਣ ਮੋਹ ਕੀ ਫਾਸ ॥
(हे भाई ! माया की खातिर) भटकना का कूआँ है~ माया की तृष्णा और विकारों के चस्के (उस कूएं में) कीचड़ हैं~ (जीवों के गले में पड़ी हुई) मोह की फाही बड़ी पक्की (तीखी) है।
ਕਾਟਨਹਾਰ ਜਗਤ ਗੁਰ ਗੋਬਿਦ ਚਰਨ ਕਮਲ ਤਾ ਕੇ ਕਰਹੁ ਨਿਵਾਸ ॥੧॥
इस फांसी के काटने के काबिल जगत का गुरू गोबिंद ही है। (हे भाई !) उस गोबिंद के चरन-कमलों में निवास किए रह। 1।
ਕਰਿ ਕਿਰਪਾ ਗੋਬਿੰਦ ਪ੍ਰਭ ਪ੍ਰੀਤਮ ਦੀਨਾ ਨਾਥ ਸੁਨਹੁ ਅਰਦਾਸਿ ॥
हे गोबिंद ! हे प्रीतम प्रभू ! हे गरीबों के मालिक ! हे नानक के स्वामी ! मेहर कर~ मेरी बिनती सुन~
ਕਰੁ ਗਹਿ ਲੇਹੁ ਨਾਨਕ ਕੇ ਸੁਆਮੀ ਜੀਉ ਪਿੰਡੁ ਸਭੁ ਤੁਮਰੀ ਰਾਸਿ ॥੨॥੩॥੧੨੦॥
मेरा हाथ पकड़ ले (और मुझे इस कूएं में से निकाल ले) मेरी ये जीवात्मा तेरी दी हुई राशि है~ मेरा ये शरीर तेरी बख्शी हुई पूँजी है (इस राशि-पूँजी को मोह के हाथों उजड़ने से तू स्वयं ही बचा ले)। 2। 3। 120।
ਗਉੜੀ ਮਹਲਾ ੫ ॥
गउड़ी महला ५ ॥
ਹਰਿ ਪੇਖਨ ਕਉ ਸਿਮਰਤ ਮਨੁ ਮੇਰਾ ॥
(हे बहिन !) प्रभू पति का दर्शन करने के लिए मेरा मन उसका सिमरन कर रहा है।
ਆਸ ਪਿਆਸੀ ਚਿਤਵਉ ਦਿਨੁ ਰੈਨੀ ਹੈ ਕੋਈ ਸੰਤੁ ਮਿਲਾਵੈ ਨੇਰਾ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
उसके दर्शन की आस से व्याकुल हुई मैं दिन रात उसका नाम याद करती रहती हूँ। (हे बहिन ! मुझे) कोई ऐसा संत (मिल जाए~ जो मुझे उस प्रभू-पति से) नजदीक ही मिला दे। 1। रहाउ।
ਸੇਵਾ ਕਰਉ ਦਾਸ ਦਾਸਨ ਕੀ ਅਨਿਕ ਭਾਂਤਿ ਤਿਸੁ ਕਰਉ ਨਿਹੋਰਾ ॥
(हे बहिन ! अगर वह गुरू संत मिल जाए तो) मैं उसके दासों की सेवा करूँ~ मैं अनकों तरीकों से उसके आगे मिन्नतें करूँ।
ਤੁਲਾ ਧਾਰਿ ਤੋਲੇ ਸੁਖ ਸਗਲੇ ਬਿਨੁ ਹਰਿ ਦਰਸ ਸਭੋ ਹੀ ਥੋਰਾ ॥੧॥
(हे बहिन !) तराजू पे रख के मैंने (दुनिया के) सारे सुख तोले हैं~ प्रभू-पति के दर्शनों के बिना ये सारे ही सुख (तेरे दर्शन के सुख से) हल्के हैं। 1।
ਸੰਤ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਗਾਏ ਗੁਨ ਸਾਗਰ ਜਨਮ ਜਨਮ ਕੋ ਜਾਤ ਬਹੋਰਾ ॥
हे नानक ! जो मनुष्य गुरू की कृपा से गुणों के समुंद्र परमात्मा के गुण गाता है (गुरू परमेश्वर उसे) अनेकों जन्मों के भटकते को (जनम-जनम के चक्करों में से) वापस ले आता है।
ਆਨਦ ਸੂਖ ਭੇਟਤ ਹਰਿ ਨਾਨਕ ਜਨਮੁ ਕ੍ਰਿਤਾਰਥੁ ਸਫਲੁ ਸਵੇਰਾ ॥੨॥੪॥੧੨੧॥
हे नानक ! परमात्मा को मिलने से बेअंत सुख आनंद प्राप्त हो जाते हैं~ मानस जनम का मनोरथ पूरा हो जाता है। जनम समय रहते (इसी जन्म में) सफल हो जाता है। 2। 4। 121।
ਰਾਗੁ ਗਉੜੀ ਪੂਰਬੀ ਮਹਲਾ ੫
रागु गउड़ी पूरबी महला ५
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है।
ਕਿਨ ਬਿਧਿ ਮਿਲੈ ਗੁਸਾਈ ਮੇਰੇ ਰਾਮ ਰਾਇ ॥
हे मेरे प्रभू बादशाह ! मुझे धरती का पति प्रभू किन तरीकों से मिल सकता है?
ਕੋਈ ਐਸਾ ਸੰਤੁ ਸਹਜ ਸੁਖਦਾਤਾ ਮੋਹਿ ਮਾਰਗੁ ਦੇਇ ਬਤਾਈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
आत्मिक अडोलता का आनंद देने वाला कोई ऐसा संत मुझे मिल जाए~ जो मुझे रास्ता बता दे। 1। रहाउ।