Sri Guru Granth Sahib Ji — Ang 1307 (hindi)
ਕਾਨੜਾ ਮਹਲਾ ੫ ਘਰੁ ੧੦
हे नानक ! गुरू के प्रताप से (मनुष्य के अंदर से माया का) मोह दूर हो जाता है। सारे डर मिट जाते हैं। भटकना समाप्त हो जाती है। 2। 5। 44।
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
कानड़ा महला ५ घरु १०
ਐਸੋ ਦਾਨੁ ਦੇਹੁ ਜੀ ਸੰਤਹੁ ਜਾਤ ਜੀਉ ਬਲਿਹਾਰਿ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि॥
ਮਾਨ ਮੋਹੀ ਪੰਚ ਦੋਹੀ ਉਰਝਿ ਨਿਕਟਿ ਬਸਿਓ ਤਾਕੀ ਸਰਨਿ ਸਾਧੂਆ ਦੂਤ ਸੰਗੁ ਨਿਵਾਰਿ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
हे संत जनों ! मुझे इस तरह का दान दो (जो पाँचों कामादिक वैरियों से बचा के रखे। मेरी) जिंद (नाम की दाति से) सदके जाती है।
ਕੋਟਿ ਜਨਮ ਜੋਨਿ ਭ੍ਰਮਿਓ ਹਾਰਿ ਪਰਿਓ ਦੁਆਰਿ ॥੧॥
(ये जिंद) अहंकार में मस्त रहती है। (कामादिक) पाँच (चोरों के हाथों) ठॅगी जाती है। (उन कामादिकों में ही) फंस के (उनके ही) नजदीक टिकी रहती है। मैंने (इनसे बचने के लिए) संत जनों की शरण ताकी है। (हे संत जनो ! मेरा इन कामादिक) वैरियों वाला साथ दूर करो। 1। रहाउ।
ਕਿਰਪਾ ਗੋਬਿੰਦ ਭਈ ਮਿਲਿਓ ਨਾਮੁ ਅਧਾਰੁ ॥
हे संत जनों ! (कामादिक पाँचों वैरियों के प्रभाव तले रह के मनुष्य की जिंद) करोड़ों जन्मों-जूनियों में भटकती रहती है। (हे संत जनो !) मैं और आसरे छोड़ के तुम्हारे द्वारे आया हूँ। 1।
ਦੁਲਭ ਜਨਮੁ ਸਫਲੁ ਨਾਨਕ ਭਵ ਉਤਾਰਿ ਪਾਰਿ ॥੨॥੧॥੪੫॥
हे भाई ! जिस मनुष्य पर परमात्मा की मेहर होती है। उसको (कामादिक वैरियों का मुकाबला करने के लिए परमात्मा का) नाम-आसरा मिल जाता है।
ਕਾਨੜਾ ਮਹਲਾ ੫ ਘਰੁ ੧੧
उसका ये दुर्लभ (मानस) जनम सफल हो जाता है। हे नानक ! (प्रभू चरणों में अरदास करके कह- हे प्रभू ! मुझे अपने नाम का आसरा दे के) संसार-समुंद्र से पार लंघा ले। 2। 1। 45।
ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥
कानड़ा महला ५ घरु ११
ਸਹਜ ਸੁਭਾਏ ਆਪਨ ਆਏ ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि॥
ਕਛੂ ਨ ਜਾਨੌ ਕਛੂ ਦਿਖਾਏ ॥
हे भाई ! (किसी) आत्मिक अडोलता वाले प्यार की प्रेरणा से (प्रभू जी) अपने आप ही (मुझे) आ मिले हैं।
ਪ੍ਰਭੁ ਮਿਲਿਓ ਸੁਖ ਬਾਲੇ ਭੋਲੇ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
मैं तो ना-कुछ जानता-बूझता हूँ। ना मैं कोई अच्छी करणी दिखा सका हूँ।
ਸੰਜੋਗਿ ਮਿਲਾਏ ਸਾਧ ਸੰਗਾਏ ॥
मुझे भोले बालक को। सुखों का मालिक प्रभू (स्वयं ही) आ मिला है। 1। रहाउ।
ਕਤਹੂ ਨ ਜਾਏ ਘਰਹਿ ਬਸਾਏ ॥
हे भाई ! (किसी बीते हुए वक्त के) संजोग ने (मुझे) साध-संगति में मिला दिया।
ਗੁਨ ਨਿਧਾਨੁ ਪ੍ਰਗਟਿਓ ਇਹ ਚੋਲੈ ॥੧॥
(अब मेरा मन) किसी भी और तरफ नहीं जाता। (हृदय-) घर में ही टिका रहता है।
ਚਰਨ ਲੁਭਾਏ ਆਨ ਤਜਾਏ ॥
(मेरे इस शरीर में गुणों का खजाना प्रभू प्रकट हो गया है)। 1।
ਥਾਨ ਥਨਾਏ ਸਰਬ ਸਮਾਏ ॥
हे भाई ! (प्रभू के) चरणों ने (मुझे अपनी ओर) आकर्षित कर लिया है।
ਰਸਕਿ ਰਸਕਿ ਨਾਨਕੁ ਗੁਨ ਬੋਲੈ ॥੨॥੧॥੪੬॥
मुझसे अन्य सारे मोह-प्यार छुड़वा लिए हैं। (अब मुझे ऐसा दिखाई देता है कि वह प्रभू) हरेक जगह में सब में बस रहा है।
ਕਾਨੜਾ ਮਹਲਾ ੫ ॥
(अब उसका दास) नानक बड़े आनंद से उसके गुण उचारता रहता है। 2। 1। 46।
ਗੋਬਿੰਦ ਠਾਕੁਰ ਮਿਲਨ ਦੁਰਾੲਂੀ ॥
कानड़ा महला ५॥
ਪਰਮਿਤਿ ਰੂਪੁ ਅਗੰਮ ਅਗੋਚਰ ਰਹਿਓ ਸਰਬ ਸਮਾਈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
हे भाई ! गोबिंद को ठाकुर को मिलना बहुत मुश्किल है।
ਕਹਨਿ ਭਵਨਿ ਨਾਹੀ ਪਾਇਓ ਪਾਇਓ ਅਨਿਕ ਉਕਤਿ ਚਤੁਰਾਈ ॥੧॥
वह परमात्मा (वैसे तो) सबमें समाया हुआ है (पर) उसका स्वरूप अंदाजे से परे है। वह अपहुँच है। उस तक ज्ञान-इन्द्रियों की पहुँच नहीं हो सकती। 1। रहाउ।
ਜਤਨ ਜਤਨ ਅਨਿਕ ਉਪਾਵ ਰੇ ਤਉ ਮਿਲਿਓ ਜਉ ਕਿਰਪਾਈ ॥
हे भाई ! (निरी ज्ञान की) बातें करने से। (तीर्थ आदि पर) भ्रमण से परमात्मा नहीं मिलता। अनेकों युक्तियों और चतुराईयों से भी नहीं मिलता। 1।
ਪ੍ਰਭੂ ਦਇਆਰ ਕ੍ਰਿਪਾਰ ਕ੍ਰਿਪਾ ਨਿਧਿ ਜਨ ਨਾਨਕ ਸੰਤ ਰੇਨਾਈ ॥੨॥੨॥੪੭॥
हे भाई ! अनेकों यतन और अनेकों तरीकों से भी परमात्मा नहीं मिलता। वह तब ही मिलता है जब उसकी अपनी कृपा होती है।
ਕਾਨੜਾ ਮਹਲਾ ੫ ॥
हे दास नानक ! दयाल। कृपाल। कृपा के खजाना प्रभू संत जनों की चरण-धूल में रहने से मिलता है। 2। 2। 47।
ਮਾਈ ਸਿਮਰਤ ਰਾਮ ਰਾਮ ਰਾਮ ॥
कानड़ा महला ५॥
ਪ੍ਰਭ ਬਿਨਾ ਨਾਹੀ ਹੋਰੁ ॥
हे माँ ! उसका नाम हर वक्त सिमरता
ਚਿਤਵਉ ਚਰਨਾਰਬਿੰਦ ਸਾਸਨ ਨਿਸਿ ਭੋਰ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
प्रभू के बिना (मेरा) और कोई (आसरा) नहीं है।
ਲਾਇ ਪ੍ਰੀਤਿ ਕੀਨ ਆਪਨ ਤੂਟਤ ਨਹੀ ਜੋਰੁ ॥
मैं दिन-रात हरेक सांस के साथ उसके सुंदर चरणों का ध्यान धरता रहता हूँ। 1। रहाउ।
ਪ੍ਰਾਨ ਮਨੁ ਧਨੁ ਸਰਬਸੋੁ ਹਰਿ ਗੁਨ ਨਿਧੇ ਸੁਖ ਮੋਰ ॥੧॥
हे माँ ! (उस परमात्मा के साथ) प्यार डाल के (मैंने उसको) अपना बना लिया है (अब यह) प्रीति की गाँठ टूटेगी नहीं।
ਈਤ ਊਤ ਰਾਮ ਪੂਰਨੁ ਨਿਰਖਤ ਰਿਦ ਖੋਰਿ ॥
मेरे लिए गुणों का खजाना हरी ही सुख है। जिंद है। मन है। धन है। मेरा सब कुछ वही है। 1।
ਸੰਤ ਸਰਨ ਤਰਨ ਨਾਨਕ ਬਿਨਸਿਓ ਦੁਖੁ ਘੋਰ ॥੨॥੩॥੪੮॥
हे नानक ! यहाँ-वहाँ हर जगह परमात्मा ही व्यापक है। मैं उसको अपने हृदय के गुप्त स्थान में (बैठा) देख रहा हूँ।
ਕਾਨੜਾ ਮਹਲਾ ੫ ॥
(जीवों को पार लंघाने के लिए वह) जहाज़ है। संतों की शरण में (जिन्हें मिल जाती है। उनका) सारा बड़े से बड़ा दुख भी नाश हो जाता है। 2। 3। 48।
ਜਨ ਕੋ ਪ੍ਰਭੁ ਸੰਗੇ ਅਸਨੇਹੁ ॥
कानड़ा महला ५॥
ਸਾਜਨੋ ਤੂ ਮੀਤੁ ਮੇਰਾ ਗ੍ਰਿਹਿ ਤੇਰੈ ਸਭੁ ਕੇਹੁ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
हे प्रभू ! तू अपने सेवक के सिर पर रखवाला है। (तेरे सेवक का तेरे) साथ प्यार (बना रहता है)।
ਮਾਨੁ ਮਾਂਗਉ ਤਾਨੁ ਮਾਂਗਉ ਧਨੁ ਲਖਮੀ ਸੁਤ ਦੇਹ ॥੧॥
हे प्रभू ! तू (ही) मेरा सज्जन है। तू (ही) मेरा मित्र है। तेरे घर में हरेक पदार्थ है। 1। रहाउ।
ਮੁਕਤਿ ਜੁਗਤਿ ਭੁਗਤਿ ਪੂਰਨ ਪਰਮਾਨੰਦ ਪਰਮ ਨਿਧਾਨ ॥
हे प्रभू ! मैं (तेरे दर से) इज्जत माँगता हूँ। (तेरा) आसरा माँगता हूँ। धन-पदार्थ माँगता हूं। पुत्र माँगता हूं। शारीरिक आरोग्यता माँगता हूँ। 1।