Sri Guru Granth Sahib Ji — Ang 1005 (hindi)
ਹਮ ਤੁਮ ਸੰਗਿ ਝੂਠੇ ਸਭਿ ਬੋਲਾ ॥
संसारी साथियों के साथ (साथ निबाहने वाले) सारे बोल झूठे ही हो जाते हैं। पर।
ਪਾਇ ਠਗਉਰੀ ਆਪਿ ਭੁਲਾਇਓ ॥
हे नानक ! (जीवों के भी क्या वश। ) परमात्मा स्वयं ही (माया के मोह की) ठॅग-बूटी खिला के जीव को गलत रास्ते पर डाल देता है।
ਨਾਨਕ ਕਿਰਤੁ ਨ ਜਾਇ ਮਿਟਾਇਓ ॥੨॥
(जन्म-जन्मांतरों के) किए हुए कर्मों के संस्कारों के समूह को मिटाया नहीं जा सकता। 2।
ਪਸੁ ਪੰਖੀ ਭੂਤ ਅਰੁ ਪ੍ਰੇਤਾ ॥
हे भाई ! (माया के मोह में) अंधा हुआ जीव पशू-पंछी भूत-प्रेत आदि
ਬਹੁ ਬਿਧਿ ਜੋਨੀ ਫਿਰਤ ਅਨੇਤਾ ॥
अनेकों जूनियों में भटकता फिरता है;
ਜਹ ਜਾਨੋ ਤਹ ਰਹਨੁ ਨ ਪਾਵੈ ॥
जिस असल ठिकाने पर जाना है वहाँ टिक नहीं सकता।
ਥਾਨ ਬਿਹੂਨ ਉਠਿ ਉਠਿ ਫਿਰਿ ਧਾਵੈ ॥
बेआसरा हो के बार-बार उठ के (और-और जूनियों में) भटकता है।
ਮਨਿ ਤਨਿ ਬਾਸਨਾ ਬਹੁਤੁ ਬਿਸਥਾਰਾ ॥
हे भाई ! (माया के मोह के कारण) मनुष्य के मन में तन में अनेकों वासनाओं का पसारा पसरा रहता है।
ਅਹੰਮੇਵ ਮੂਠੋ ਬੇਚਾਰਾ ॥
अहंकार इस बेचारे के आत्मिक जीवन को लूट लेता है।
ਅਨਿਕ ਦੋਖ ਅਰੁ ਬਹੁਤੁ ਸਜਾਈ ॥
इसके अंदर ऐब पैदा हो जाते हैं। और उनकी सजा भी बहुत मिलती है
ਤਾ ਕੀ ਕੀਮਤਿ ਕਹਣੁ ਨ ਜਾਈ ॥
(उससे बचने की दुनियावी पदार्थों की कोई) कीमत नहीं बताई जा सकती (किसी भी कीमत से इस सजा से खलासी नहीं हो सकती)।
ਪ੍ਰਭ ਬਿਸਰਤ ਨਰਕ ਮਹਿ ਪਾਇਆ ॥
हे भाई ! परमात्मा का नाम भूलने के कारण जीव नर्क में फेंका जाता है।
ਤਹ ਮਾਤ ਨ ਬੰਧੁ ਨ ਮੀਤ ਨ ਜਾਇਆ ॥
वहाँ ना माँ। ना कोई संबंधी। ना कोई मित्र। ना स्त्री - (कोई भी सहायता नहीं कर सकता)।
ਜਿਸ ਕਉ ਹੋਤ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ਸੁਆਮੀ ॥
जिस पर मालिक-प्रभू मेहरवान होता है।
ਸੋ ਜਨੁ ਨਾਨਕ ਪਾਰਗਰਾਮੀ ॥੩॥
हे नानक ! (कह- हे भाई !) वह मनुष्य (संसार-समुंद्र से) पार लांघने योग्य हो जाता है 3।
ਭ੍ਰਮਤ ਭ੍ਰਮਤ ਪ੍ਰਭ ਸਰਨੀ ਆਇਆ ॥
जीव भटक-भटक के (आखिर उसकी) शरण आता है।
ਦੀਨਾ ਨਾਥ ਜਗਤ ਪਿਤ ਮਾਇਆ ॥
हे भाई ! प्रभू दीना नाथ है। जगत का माता-पिता है।
ਪ੍ਰਭ ਦਇਆਲ ਦੁਖ ਦਰਦ ਬਿਦਾਰਣ ॥
दया का घर है। (जीवों के) दुख-दर्द दूर करने वाला है।
ਜਿਸੁ ਭਾਵੈ ਤਿਸ ਹੀ ਨਿਸਤਾਰਣ ॥
हे भाई ! जो जीव उस प्रभू को अच्छा लगने लगता है उसको वह (संसार-समुंद्र से) पार लंघा देता है।
ਅੰਧ ਕੂਪ ਤੇ ਕਾਢਨਹਾਰਾ ॥
हे भाई ! (संसार-रूप) अंधे कूएँ में से (प्रभू जीव को) निकालने के समर्थ है।
ਪ੍ਰੇਮ ਭਗਤਿ ਹੋਵਤ ਨਿਸਤਾਰਾ ॥
प्रभू की प्यार-भरी भक्ति से जीव का पार-उतारा हो जाता है।
ਸਾਧ ਰੂਪ ਅਪਨਾ ਤਨੁ ਧਾਰਿਆ ॥
हे भाई ! परमात्मा ने गुरू-रूप अपना शरीर (स्वयं ही सदा) धारण किया है।
ਮਹਾ ਅਗਨਿ ਤੇ ਆਪਿ ਉਬਾਰਿਆ ॥
और जीवों को माया की बड़ी आग से स्वयं ही सदा बचाया है।
ਜਪ ਤਪ ਸੰਜਮ ਇਸ ਤੇ ਕਿਛੁ ਨਾਹੀ ॥
वरना इस जीव से जप तप (नाम की कमाई) और संजम (शुद्ध आचरण) की मेहनत कुछ भी नहीं हो सकती।
ਆਦਿ ਅੰਤਿ ਪ੍ਰਭ ਅਗਮ ਅਗਾਹੀ ॥
हे प्रभू ! जगत के आरम्भ से अंत तक तू ही तू कायम रहने वाला है। तू अपहॅुच है। तू अथाह है।
ਨਾਮੁ ਦੇਹਿ ਮਾਗੈ ਦਾਸੁ ਤੇਰਾ ॥
तेरा दास तेरे दर से तेरा नाम माँगता है।
ਹਰਿ ਜੀਵਨ ਪਦੁ ਨਾਨਕ ਪ੍ਰਭੁ ਮੇਰਾ ॥੪॥੩॥੧੯॥
हे नानक ! (कह- हे भाई !) मेरा हरी-प्रभू आत्मिक जीवन का दर्जा (देने वाला) है। 4। 3। 19।
ਮਾਰੂ ਮਹਲਾ ੫ ॥
मारू महला ५॥
ਕਤ ਕਉ ਡਹਕਾਵਹੁ ਲੋਗਾ ਮੋਹਨ ਦੀਨ ਕਿਰਪਾਈ ॥੧॥
हे लोगो ! तुम क्यों अपने मन को डोलाते हो। सुंदर प्रभू गरीबों पर दया करने वाला है। 1।
ਐਸੀ ਜਾਨਿ ਪਾਈ ॥
हे भाई ! मैंने तो ऐसा समझ लिया है कि परमात्मा सबसे बड़ा दाता है।
ਸਰਣਿ ਸੂਰੋ ਗੁਰ ਦਾਤਾ ਰਾਖੈ ਆਪਿ ਵਡਾਈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
शरण पड़ों की मदद करने वाला सूरमा है। (अपने सेवक की) आप लाज रखता है। 1। रहाउ।
ਭਗਤਾ ਕਾ ਆਗਿਆਕਾਰੀ ਸਦਾ ਸਦਾ ਸੁਖਦਾਈ ॥੨॥
हे लोगो ! परमात्मा अपने भक्तों की आरजू मानने वाला है। और (उनको) सदा सुख देने वाला है। 2।
ਅਪਨੇ ਕਉ ਕਿਰਪਾ ਕਰੀਅਹੁ ਇਕੁ ਨਾਮੁ ਧਿਆਈ ॥੩॥
(हे प्रभू ! मैं नानक तेरे दर का सेवक हूँ) अपने (इस) सेवक पर मेहर करनी। मैं (तेरा सेवक) तेरा नाम ही सिमरता रहॅूँ। 3।
ਨਾਨਕੁ ਦੀਨੁ ਨਾਮੁ ਮਾਗੈ ਦੁਤੀਆ ਭਰਮੁ ਚੁਕਾਈ ॥੪॥੪॥੨੦॥
हे प्रभू ! किसी और दूसरे (को तेरे जैसा समझने) का भुलेखा दूर कर के गरीब नानक (तेरे दर से) तेरा नाम माँगता है। 4। 4। 20।
ਮਾਰੂ ਮਹਲਾ ੫ ॥
मारू महला ५॥
ਮੇਰਾ ਠਾਕੁਰੁ ਅਤਿ ਭਾਰਾ ॥
हे भाई ! मेरा मालिक प्रभू बहुत सारी ताकतों का मालिक है।
ਮੋਹਿ ਸੇਵਕੁ ਬੇਚਾਰਾ ॥੧॥
मैं (तो उसके दर पे एक) निमाणा सेवक हूँ। 1।
ਮੋਹਨੁ ਲਾਲੁ ਮੇਰਾ ਪ੍ਰੀਤਮ ਮਨ ਪ੍ਰਾਨਾ ॥
हे मेरे मन के प्यारे ! हे मेरे प्राणों के प्यारे ! तू मेरा सुंदर प्यारा प्रभू है।
ਮੋ ਕਉ ਦੇਹੁ ਦਾਨਾ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
मुझे (अपने नाम का) दान बख्श। 1। रहाउ।
ਸਗਲੇ ਮੈ ਦੇਖੇ ਜੋਈ ॥
हे भाई ! अन्य सारे आसरे खोज के देख लिए हैं।
ਬੀਜਉ ਅਵਰੁ ਨ ਕੋਈ ॥੨॥
कोई और दूसरा (उस प्रभू के बराबर का) नहीं है। 2।
ਜੀਅਨ ਪ੍ਰਤਿਪਾਲਿ ਸਮਾਹੈ ॥
हे भाई ! परमात्मा सारे जीवों को पालता है। सबको रोज़ी पहुँचाता है।
ਹੈ ਹੋਸੀ ਆਹੇ ॥੩॥
वह अब भी है। आगे भी कायम रहेगा। पहले भी था। 3।
ਦਇਆ ਮੋਹਿ ਕੀਜੈ ਦੇਵਾ ॥
हे नानक ! (कह-) हे देव ! मेरे पर दया कर।
ਨਾਨਕ ਲਾਗੋ ਸੇਵਾ ॥੪॥੫॥੨੧॥
मैं तेरी सेवा-भक्ति में लगा रहूँ। 4। 5। 21।
ਮਾਰੂ ਮਹਲਾ ੫ ॥
मारू महला ५॥
ਪਤਿਤ ਉਧਾਰਨ ਤਾਰਨ ਬਲਿ ਬਲਿ ਬਲੇ ਬਲਿ ਜਾਈਐ ॥
हे भाई ! विकारियों को बचाने वाले और (संसार-समुंद्र से) पार लंघाने वाले परमात्मा से सदा ही बलिहार जाना चाहिए।
ਐਸਾ ਕੋਈ ਭੇਟੈ ਸੰਤੁ ਜਿਤੁ ਹਰਿ ਹਰੇ ਹਰਿ ਧਿਆਈਐ ॥੧॥
(हर वक्त यही प्रार्थना करनी चाहिए कि) कोई ऐसा संत मिल जाए जिससे सदा ही परमात्मा का सिमरन किया जा सके। 1।
ਮੋ ਕਉ ਕੋਇ ਨ ਜਾਨਤ ਕਹੀਅਤ ਦਾਸੁ ਤੁਮਾਰਾ ॥
हे प्रभू ! मुझे (तो) कोई नहीं जानता। पर मैं तेरा दास कहलवाता हूँ।
ਏਹਾ ਓਟ ਆਧਾਰਾ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
मुझे यही सहारा है। मुझे यही आसरा है (कि तू अपने दास की लाज रखेगा)। 1। रहाउ।
ਸਰਬ ਧਾਰਨ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰਨ ਇਕ ਬਿਨਉ ਦੀਨਾ ॥
हे सारे जीवों को सहारा देने वाले ! हे सबको पालने वाले ! मैं निमाणा एक विनती करता हूँ कि
ਤੁਮਰੀ ਬਿਧਿ ਤੁਮ ਹੀ ਜਾਨਹੁ ਤੁਮ ਜਲ ਹਮ ਮੀਨਾ ॥੨॥
तू पानी हो और मैं तेरी मछली बना रहूँ (पर ये कैसे संभव हो सके- ये) जुगति तू स्वयं ही जानता है। 2।
ਪੂਰਨ ਬਿਸਥੀਰਨ ਸੁਆਮੀ ਆਹਿ ਆਇਓ ਪਾਛੈ ॥
हे सर्व-व्यापक ! हे सारे पसारे के मालिक ! मैं तेरी शरण आ पड़ा हूँ।
ਸਗਲੋ ਭੂ ਮੰਡਲ ਖੰਡਲ ਪ੍ਰਭ ਤੁਮ ਹੀ ਆਛੈ ॥੩॥
यह सारा आकार- धरती। धरतियों के चक्कर। धरती के हिस्से- ये सब कुछ तू स्वयं ही स्वयं है (तूने अपने आप से पैदा किए हैं)। 3।